एक नई शुरुआत…

नमस्कार,
मैं पल्लव।

आज मैं अपनी वेबसाइट पर अपनी पहली पोस्ट लिख रहा हूँ।एक ऐसी शुरुआत, जिसका इंतज़ार मैं कई महीनों से कर रहा था। हमेशा से इच्छा थी कि एक ऐसा अपना स्पेस हो, जहाँ मैं खुलकर लिख सकूँ, अपने विचार साझा कर सकूँ और बिना किसी हड़बड़ी या भीड़ के, अपनी बात साफ़-साफ़ रख सकूँ।
सोशल मीडिया अपनी जगह है, लेकिन वहाँ सब कुछ बहुत जल्दी गायब हो जाता है।
यह वेबसाइट मेरे लिए एक स्थायी जगह है,मेरी अपनी आवाज़, मेरे अपने शब्द।

आज की पोस्ट के साथ मैं अपने नियमित लेखन की शुरुआत कर रहा हूँ। आने वाले समय में मैं अलग-अलग विषयों पर, संपादकीय-जैसी शैली में, अपने विचार और अनुभव लिखूँगा।

बीते दिनों BPSC प्रीलिम्स में 1.66 अंक से चूक जाने के बाद मुझे लगा कि अब जबतक समय है अपनी ऊर्जा को नए कामों में लगाया जाए। लंबे समय से ठीक से कुछ लिखा भी नहीं था। शायद वही खालीपन मुझे फिर से लिखने की तरफ ले आया।

जब इंसान भीतर से थक जाता है या खुद पर सवाल उठाने लगता है, तब उसे अपने वास्तविक रूप का एहसास होता है।वह क्या सोचता है, उसमें कौन-सी ताकतें हैं, उसकी कमजोरियाँ क्या हैं।
एकांत में जहाँ आस-पास कोई शोर नहीं । मेरे मन में अक्सर कई सवाल उठते रहते हैं-

यह दुनिया ऐसी क्यों है?


लोग जिस तरह व्यवहार करते हैं, उसका कारण क्या है?
मनुष्य का होना कितना ज़रूरी है?
और अगर ज़रूरी है, तो फिर ईर्ष्या, द्वेष, तनाव, विवाद और मनोभावों के इतने उतार-चढ़ाव क्यों पैदा होते हैं?
एक पल प्यार जैसा एहसास क्यों होता है और अगले ही पल उदासी क्यों घेर लेती है?

इन्हीं सवालों, विचारों और अनुभवों को शब्दों में ढालने के लिए मैंने अपनी वेबसाइट शुरू की है। उम्मीद है यहाँ एक सार्थक संवाद बन पाएगा।

बहुत जल्द फिर मिलेंगे एक नई, ताज़ा और सोचने पर मजबूर कर देने वाली पोस्ट के साथ।

आपका अपना,
पल्लव
pallavkr.com

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